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💐💐पापी कौन💐💐

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एक बार, मैं किसी काम से, बस द्वारा सफर कर रहा था,   12-13  घण्टे का लंबा सफर था, बात उस जमाने की है जब , राष्ट्रीय राजमार्ग पर  कई कई किलोमीटर तक कोई आबादी नही मिलती थी।

हमारी बस शाम को चली, रात भर सफर करके दूसरे दिन हमे गन्तव्य तक पहुचना था, 2-3 घण्टे के सफर के बाद ही बारिश चालू हो गयी,  धीरे धीरे बारिश ,  तेज तूफान का रूप लेती चली गयी, जैसे जैसे समय बढ़ रहा था तूफान बढ़ रहा था, बिजली गिर रही थी , उस तेज बारिश तूफानी रात में बस में बैठे सभी लोग घबरा रहे थे, और तरह तरह की बाते करने लगे, फिर  बिजली  कई बार बस के  आस पास ही गिरने लगी, जिसके कारण बस में बैठे लोगों  की चर्चा  और तेज हो गयी कि  जरूर इस बस में कोई पापी व्यक्ति बैठा  है,  जिसकी वजह से  बिजली उसके ऊपर गिरने के लिये बस के  आस पास ही गिर रही है, कुछ लोग चिल्लाने लगे कि  ढूंढो  उस व्यक्ति को, निकालो बस से, नही तो हम सब मारे जाएंगे।

बहुत सारे तेज तर्राक लोग थे, कुछ अच्छे सम्पन्न दिखने वाले, आखिरकार उन चिल्लाने वाले लोगो की टोली ने , एक व्यक्ति को चुना वो एक  बहुत गरीब  सी दिखने वाली बुढ़िया थी, सब लोग उसी पर चीखने चिल्लाने लगे कि यही पापिन है, इसे बस से तुरन्त उतारो! मैंने उस बुढ़िया को देखा, जो उन लोगो के निराधार आरोपो से घबराई हुई थी, शायद रो भी रही थी मेरे मन में उस बुढ़िया को देख कर दया फूटी, और विचार आया कि ये दुनिया निर्बल को ही सताती है, उस दया भाव के कारण मैंने उन लोगो को समझाने का प्रयास किया कि इतनी तूफानी रात में , इस जंगल में , रास्ते में इस बेचारी बुढ़िया को उतार दोगे तो शायद ये इस तूफान में मर भी जाए।
परन्तु भीड़ कहाँ किसी की सुनती है ??

वही हुवा, वो सब लोग मेरे ऊपर ही चढ़ गए कि   तुझे ज्यादा चिंता सता रही है इस बुढ़िया की  ??  तो तू भी उतर जा इसके साथ उन लोगो ने मुझे भी चुप करा दिया , मैं  चुप हो कर अपनी सीट में  बैठ  गया अब मेरे मन मे द्वंद चल रहा था कि क्या करूँ ??  बाहर तेज  तूफानी रात, जंगल, दूर दूर तक आबादी नही, उस बुढ़िया के प्रति दया भी आ रही थी, और भगवान पर गुस्सा भी आ रहा था कि भगवान ने भी कैसी  दुनिया बनाई है , सब लोग कमजोर को ही सताते हैं, इस बुढ़िया का क्या होगा ?? मुझे डर भी लग रहा था।

आखिरकार, उस चिल्लाती भीड़ ने, उस कमजोर बुढ़िया को जबरदस्ती बस से उतार दिया, उस बुढ़िया का चेहरा देख कर, अचानक मेरे अंदर बहुत तेज दया के आँसू फूटे, और मैं भी उस बुढ़िया को सहारा देते हुए, नीचे उतर गया, सड़क के पास एक पेड़ के नीचे जाने की तरफ बढ़ा मुझे उस बुढ़िया के साथ  नीचे उतरते उस बस के सभी लोगो ने देखा, अधिकतर लोगों ने मुझे मूर्ख कहा — किसी ने चेहरे से, किसी ने शब्दों से, किसी ने अठ्ठाहस  हँसी से, मैं उस बुढ़िया को लिए सड़क पर खड़ा था,पेड़ की तरफ जाते जाते , मैं जाती हुई बस को देख रहा था, जिसमे लोग हँस रहे थे, मेरे निर्णय पर।
 बस कुछ ही दूर चली थी कि मेरे देखते देखते ही, एक बिजली उस बस पर गिरी  और पूरी बस जल कर राख हो गयी, सब लोग जल कर मर गए।

💐💐शिक्षा💐💐
किसी पर दया फूटे, उस भाव दशा में, अपने किसी भी नुकसान की परवाह किये बगैर, जो कुछ हमने मदद की तो परिणाम शुभ ही होगा, हो सकता है कभी जल्दी दिखाई दे, कभी देर से किसी की बाहरी क्रिया, अवस्था देख कर हम किसी के ऊपर ये आरोप नही लगा सकते कि वो पापी है, किसी को पापी कहने का, मानने का अधिकार हमें नहीं है, हम जज नही है, किसी को पापी मान कर यदि हम उससे द्वेष करते है, उलाहना देते हैं  तो हमें उसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा।



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