Milyin Featured 10

Thumbnail जैसी ज़िंदगी !

puneet kaurLast Seen: Sep 20, 2023 @ 6:09pm 18SepUTC
puneet kaur
@puneet-kaur

16th October 2023 | 6 Views
Milyin » 418307 » Thumbnail जैसी ज़िंदगी !

Info: This Creation is monetized via ads and affiliate links. We may earn from promoting certain products in our Creations, or when you engage with various Ad Units.

How was this Creation created: We are a completely AI-free platform, all Creations are checked to make sure content is original, human-written, and plagiarism free.

Toggle

Thumbnail जैसी ज़िंदगी – इस कविता में उस धोखे की बात है, जो हम ख़ुद को रोज़ देते हैं, अंदर से ना सही, पर बाहर से सब सँवरा रहे, अंदर चाहे कुछ भी हो लेकिन Thumbnail गज़ब का होता है.

आँखें हैं सूझी सी,
कहा धुएँ का है खेल,
श..श..  जान न पाए कोई 
दे दो हँसता हुआ ‘थंबनेल’

काजल के फैलने की कहानी रात की है 
जो अंदर कहीं चुप है,
बात उस बात की है 
थोड़ा सा यहाँ सिसकियों का भी है मेल 
दे दो कोई चमकदार सा ‘थंबनेल’

बिखरे से बाल,
धीमी सी चाल,
न हुई आवाज़, न ही बवाल 
जैसे हुई हो आरज़ूओं को जेल 
दे दो कोई आज़ाद सा ‘थंबनेल’

आज थोड़ा हस भी लूँ 
जज़्बात थोड़े कस लूँ 
जैसे बसीं हैं मुझ में तमाम मुश्किलें 
वैसे तुझ में बस भी लूँ 
लेकिन कैसे खेलूँ झूठ का खेल 
क्यूँ लगाऊं झूठा थंबनेल 
 

Puneet Kaurr
 

puneet kaurLast Seen: Sep 20, 2023 @ 6:09pm 18SepUTC

puneet kaur

@puneet-kaur

Following0
Followers0


You may also like

Leave a Reply