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Meri doggi soonu in hindi

Z a KhanLast Seen: Mar 27, 2024 @ 8:09pm 20MarUTC
Z a Khan
@Zakhan

7th March 2024 | 2 Views

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यह कहानी एक इंसान और एक कुतती की है,,इस कहानी का आधार यह है की, प्यार और भावनाएं सिर्फ़ इंसान के प्रति नही होती , बल्के के जानवर के प्रति भी होती हैं, ठीक इसी तरह यह डॉगी जिसका नाम सोनू है, डॉगी जो मुझे सड़क पर मिली थी ,इस का नाम मै ने सुनो रखा था ।वो इतनी प्यारी थी के कुछ पूछो मत , असल में में एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर हूं यहां पास में ही एक गांव है, जिसका नाम चंद्र नगर है, मै जब भी वहां जाता अक्सर बेकरी में चाय पिया करता था, एक दिन मेरी नजर एक डॉगी कुत्तई पर पड़ी जो मुझे घूर रहीं थी , और वोबी बहुत भूखी और प्यासी लग वी रही थी ,जब मै ने बेकरी वाले से एक बन लेकर खाने के लिए डाला ,वो फटक से खा गई, फिर लगातार २० बन खा गई जब वो करीब आई तो मैंने देखा , उस को बवासीर की बीमारी लगी है , उसका बदन पूरा जख्मों से भरा हुआ था ,इसी वजह से उसके धर वाले डॉगी को बाहर सड़क पर भूखा प्यासा इस हालात में छोड़ दिया है.जब मै ने बेकरी वाले से पूछा यह किस का डॉगी हैं तू उसने कहा, यह हमारे दुकान मालिक का डॉगी है बीमारी की वजह से इसे रोड पर छोड़ दिया है . मुझे उसे देखकर कर बहुत दुख हुआ, फिर मैं वहां से अपने काम पर चला आया . वो असल मे एक लेब्रेडोल जाती की डॉगी थी .. जब मैं उसकी की तरफ से वापस आ रहा था.तब वो डॉगी मेरी तरफ ही घूर के देख रही थी i .. जैस के उसका मेरा कोई जनउमों का संबंध हो, फिर मैं अपने काम पर लौट गया , फिर अगले दिन ठीक उसी टाइम पर जब मै बेकरी के पास पहुंचा और रोज की तरह चाय पी, और नजर यहां वहां घुमा के देखा, तो डॉगी वहां वो नही थी मै उस बेकरी वाले से पूछा,वो डॉगी कहीं नजर नहीं आ रही है, कहां गईं, उस ने कहा , मालूम नहीं सुबह से मुझे नजर नही आई , मालूम नही उस दिन वो कहां गई, फिर मैं वहां से निकल कर अपने काम पर चला आया , दिन भर अपने रिक्शा में मसरूफ था ,बस दो दिन मै वहा नही गया अपने काम में व्यस्त था फिर तीसरे दिन जब मैं वहां पहुंचा, जैसे मैने अपनी गाड़ी को बेकरी के करीब रोका, वो डॉगी झापत से आकर मुझ पर झपट पड़ी जैसे के मेरा उसका सालो कोई नाता है, मै दो मिनट के लिए अस्चरिथ हो गया फिर मे ने उससे २० बन की पॉकेट खिलाई , सभी बन वो खा गई,, इसका व्यवहार देकर मन लुभाने लगा मुझे , उससे वहां छोड़ ने को दिल नही माना, पर क्या करूं, बेकरी वाला पुरी नजर मुझ पर रखा था, थोड़ी अपने मन कुई उपचार सोचकर मे वहां से निकल अपनी से रिक्शा आया फिर मे काम से आकर पुरी रात घर में सोच ता रहा वो डॉगी को कैसे वहां से ले आवूं , कुछ आइडिया दिमाग में आया और सोच कर सो गया , फिर दूसरे दिन मैने सबसे पहले एक बुजुर्ग से मिला जो यहां पास के गांव में वेध थे फिर मै ने डॉगी की बीमारी के बारे में बताया फिर वो बुजृग ने उस बीमारी इलाज बताया ,फिर मैं सुनकर अपनी ड्यूटी पर चला गया ,ड्यूटी के बाद में बेकरी के पास गया, मै ने चाय पी , फिर वैसे ही वो डॉगी मुझे वहां देकर बहुत खुश हो गई, मैने उसे बन खिलाया, फिर बेकरीवाले को कुछ पैसे देकर, पटाया, बड़ी मुश्किल से बजरी वाला मेरी बात पर राजी हुआ, फिर डॉगी को अपने रिक्शा मैं बिठा कर अपने धर ले आया, डॉगी की जख्मी हालात देखकर घर वाले , मुझ पर बिगड़ गाए और डॉगी को घर मैं नहीं जमाए, मुझे भी घर से निकाल दिया, अपने घरवाले बोले अगर डॉगी से इतनी प्रेम है तो डॉगी को ले जाकर कहीं दूर रहे लो, पर यहां मत लाना, फिर मैं और मैरी डॉगी अपने घर से एक मिली दूर एक मैदान था , वहां में और डॉगी मेरी ऑटो रिक्शा में रहते थे, फिर मैने डॉगी का इलाज शुरू किया , केरोसिन का तेल और मेंहदी दोनो के अच्छी तरह मिक्स करके सारे बदन पर लेप करता था, ऐसे लगातार एक हफ्ता किया, मेंहदी के करण डॉगी सोनू लाल हो गई थीं , वो कलर उस पर जजता था ,कुछ ही दिनो में डॉगी सोनू अच्छी होने लगी , डॉगी रिक्शा में मेरे साथ रहती थी, वो ऊपर केबिन में सूती मै सीट पर सूता था , रात में दस बार वूटकर देखती थी कहीं मे उसे छोड़ कर न गया हूं ,मै जहान जाता मेरे साथ डॉगी रहती थी, मे जब रिक्शा में पैसेंजर्स को बिठा लेता तब वो डॉगी मेरे पास फुट बोर्ड के दाएं साइट बैठ जाती , सब लोग उसे देखकर आश्चर्य होते हम दोनो में अच्छा प्रेम था, सारे महोले के लोग हम दोनो को देखकर अस्चरित हो जाते और डॉगी सोनू, मेरी हर बात मानती थी, एक इंसान की औलाद अपने मां बाप की बात इतना नहीं मानता, , उतना डॉगी सोनू मेरी हर बात मानती समझती थीं , बड़ा अजीब प्रेम था हम दोनो का फिर कुछ दिन बाद अपने घर वाले मुझे और डॉगी सोनू को अपने घर मैं रख लिए ,डॉगी सोनू के नजाकत और प्यारे हरकत को देखकर कोई भी उसका diwana होजाता, अपने सब परिवार के लोग भी सोनू डॉगी के दीवाने हो गाए थे, मुझ से ज़्यादा मेरे परिवार के लोग सोनू डॉगी को चाहने लगे, खूब मेरे बच्चो के साथ दिन भर डॉगी सोनू खेला करती थीं, सारा दिन खूब मस्ती करती थी मेरे बच्चे भी बहुत खुश थे, जब मै शाम ड्यूटी से घर आता तो बाहर बैठकर मेरे आने की राह देखती थी ,और मुझे देखकर खुशी से झूम वूटती थी, जब भी मैं घर में रहता डॉगी को नहला ता , एक इंसान के बच्चे की तरह बड़े मज़े लेकर वो पानी नहाया करती थी, फिर उससे बी घूमने फिराने ले जाया करता था, उसके के साथ वक्त बिताने का एक अजीब सा आनंद आता था, बहुत खुशी हमे भी मिलती और वो भी बहुत खुश थी अपने साथ, फिर एक दिन ऐसा भूजाल आया, डॉगी का असली मलिक मेरा घर ढूंढ ते होवे, मेरे घर तक आकर पहुंचा , फिर मुझ से डॉगी के बारे में पूछा,तब अपनी डॉगी सोनू उस आदमी को देकर छुप गई थी, मैने उससे लड़कर झग्गड़न कर वापस भेज दिया,फिर बी डॉगी बहुत मायूस लग ने लगी, में और मेरे बच्चे डॉगी सोनू का दिल बहलाने लगे, कुछ ही देर में वो सब भूल गई ,फिर मेरे बच्चे भी मुझ से सवाल करने लगे, पापा क्या सोनू को वो आदमी आकर ले जायेगा,मैने कहा ऐसा नही हू सकता, देखेंगे क्या मुक्वाददार को क्या मंजूर है, यह बोलकर मै फिर मैने बेकरी वाले के पास जाकर, बहुत झगड़ा कियान क्यूंकि,इसी ने मेरा घर का एड्रेस बताया था और मैने बेकरी वाले को वार्निंग भी दी, अगर कोई भी मेरे घर के पास आया तू तुझे नहीं छोड़ोऊंगा यह बोलकर, मै फिर अपने काम पर रिक्शा लेकर निकल ई निकल पड़ा, कुछ दिन ऐसे ही बीत गाए , सुबह और शाम सोनू के सात वक्त बीतता गया , फिर एक मेरी छोटी थी सोनू के सात मै और मेरे बच्चे खेल रहे थे तभी अचानक सुनूं का मालिक २पुलिसवालों के सात आकर मेरे सामने खाड़ा हो गाया, मेरे तो , कुछ पल के लिए होश ही उड़ गाए थे, सोनू उसके मालिक को देकर डर गईं ओर जाकर मेरे रिक्शा के नीचे छुप गई , पुलिसवालों ने मुझे बुलाया और सुनूं की पूछा , कहां है वो, मैने कहा यही है वो, मुझ पर सोनू के चुराने का अरूप लगा रहे थे , फिर मैने सारी साचायी पुलिसवालों के बताई , उन्हे यकीन नही हुआ, जब सोनू का मालिक , उसे नीचे बैठा देकर प्रिंसेस के नाम से पुकार ने लगा, तो वो केयर भी नही कर रही थी , डर के मारे सबक के बैठ गई थी ,तभी मुझे पता चला सोनू का नाम प्रिंसेस है, फिर ,, फिर पुलिसवाले मुझे डॉगी को बोलने के लिए बोले ,जब मैने उसको सोनू के नाम से बुलाया तो दौड़ कर, मुझ पर आके झपट गई , पुलिसवाले यह सारा मंजर देख रहे थे और उन्हे सब कुछ एमजे समझ में आ गया , और थोड़ी देर सोच कर पुलिसवाले मुझे बुलाए और कहा , हमे सब समझ में आगया ,तुम एक काम करो डॉगी उसके मालिक के हवाले करदो ,क्यूंकि वो भी बहुत परेशान है , बेचारा , मैने कहा अगर इतनी फ्फिकर होती, तो डॉगी को बीमारी की हालत में सड़क पर नही छोड़ ता, पुलिसवाले आखिर उसके दोस्त थे, उसकी बात कहा निकलते, मैने उससे डॉगी को वापस देने से मना कर दिया, फिर पुलिसवाले उससे शायद पैसे खा कर आए थे या कुछ और मालूम नही, मुझे धाराऊं घूस दे रहे थे, मुझे जेल डालने की धमकी दे रहे थे, मैने कहा साहेब सड़क से इससे बीमारी की हालात मैं ऊठाकर तीन महीनों से अपनी औलाद की तरह पाला है ,जेल जाने के डर से , कोई अपनी औलाद को ऊठा कर दे देगा, मै जेल जाने के लिए तैयार हूं, फिर पुलिसवाले और मालिक दोनो परेशान होगाए, फिर मुझे पैसों का ललच दिया, पर मैने कहा, मै गरीब हूं पर ,लालची नही हूं, और थोड़े पैसे के लिए अपनी परवरिश और संतान, नही बेच सकता, तभी मेरे दिमाग की बाती जली और पुलिसवालों से, कानून के हट कांडू में बात किया , मैने कहा, जब बच्चों के मां बाप , आपस में लड़ लेते हैं , और बच्चे बालिग हो गाए हैं, तब कोर्ट मैं डाइवर्स और बच्चों की कस्टडी के लिए , जुर्ज के आगे फैसला रखते हैं ,नया मंत्रालय फैसले किस के हक़ में सुनाएंगे, मैने पुलिसवालों से पूछा, पुलिसवाले सवाल सुनकर दंग रहे गाए, फिर मैने ही ,उन्हे कहा, बच्चो की कस्टडी उन्ही को मिलेगी जो बच्चों को अच्छी तरह चाहते है, ऊंकी अच्छी परवरिश करते हैं, और जहां बच्चे खुशी से रहना चाहते हैं,, ठीक इसी तरह , इस डॉगी कभी फैसला होगा, और मुझे मालूम था साहेब एक न एक दिन ऐसा होगा, उसका मालिक कुछ न कुछ हरकत करेगा, इस लिए मैने, इस की बीमारी के वक्त ,इस डॉगी के फोटोग्राफ अपने पास रखे हैं,और में घर के अंदर गाया, और फोटो ग्राफ और कोमेडिकल ट्रीटमेंट की पर्चियां ला के पुलिसवालों के हाथों मैं दे दिया, और मैने कहा साहब, आप धाराएं मुझे लगाना चाहते थे, इन फोटोस के जरिए मे चाहूं तो एनिमल एक्ट के जरिए इस मालिक को अंदर करा सकता हूं और केस भी कर सकता हूं , पुलिसवाले और मालिक यह सब देखकर दंग, होगायेः और मेरी तरफ देख रहे थे, पता नही आपस मैं क्या बातचीत किए, मालूम नही, सभी चीज़ें मेरे हाथ मैं देकर चुप चाप , मूव, फेर कर चले गाए, उन को समझ मैं आगया यहां कुई दाल गलने वाली नही है, मे और मेरे बच्चे और अपनी सुनो उनके जाने के बाद बहुत खुश होगायेग, फिर सोनू हमारे साथ रहने लगी , कुछ महीने बाद सोनू ने तीन बच्चों को जन्म दिया बहुत खूबसूरत थे तीनों के तीन भी बिलकुल अपनी मां की तरह ,पर उसकी बदखिसमत्ती यह थी के , एक भी बचा जीवित नहीं रहा, फिर बाद मैं मै सबसे पहले उस आदमी का धन्यवाद करने के लिए निकल पड़ा ,जिसकी वजह से आज सुनो घर मैं है, दरअसल दोस्तों आप जानते हैं नारियल मैं से मलाई को निकाल ने के लिए ऊंगली को टेढ़ा करना पडता है, ठीक इस तरह मै जब परेशान था सुनूं के मालिक को पहली बार घर के पास देखकर , दो दिन मै सूच कर सोया नही , रात भर सोचता रहा, कैसे सोनू को उसके मालिक से पीछा चूड़डाऊं, क्योंकि इतनी मेहनत करने के बाद सोनू उसके मालिक के घर चले गईं तो अपना जीना तो बेकार है, फिर मै मेरे एक दोस्त से जाकर मिला , उसका नाम था ,क्राइम बादशाह ,क्यूंकि वो हेर फेर ,में वो बहुत माहिर था , ऊसको मैने सोनू और उसके मालिक की सारी बात बताई उसने मुझे सिर्फ सलाह नही बल्के सात आकर काम करवाके दिया, सबसे पहले एक जानवरों की हॉस्पिटल , ले गाया, जहान उसका दोस्त काम करता था , वहां अपना टाइम ऐसा चमका , जैसा हमने , हॉस्पिटल में प्रवेश किए , ठीक उसी वक्त सोनू जैसी हुभ हू जेरिक्स , शकल की डॉगी नजर आई, जो उसे भी बवासीर की बीमारी लगी थी मैंने अपने दोस्त बादशाह को बताया, फिर वो उसी वक्त , उसकी तस्वीरें अपने मोबाइल से खींच लिया, उस वक्त अपने पास स्मार्ट फ़ोन नही था, फिर मैने उसे पूछा यह किस लिए, बोला के बाद मैं बताऊंगा, अखिर वो क्राइम का बादशाह था ,फिर अंदर , कैसुअलिटी के कमरे मैं गया और उसके दोस्त को मिला जिसका नाम मन्नु था, वो , वेटरनिटी हॉस्पिटल मैं काम करता था, बादशाह ने वही मोबाइल से खेचीं तस्वीरें दिखाकर उसे सारा किस्सा सुनाया, उसने थोड़ी देर सोचकर कहा, बस इतनी सी बात, फिर असने डॉगी का नाम पूछा, फिर ५०० रूपय इस काम के मांगे,मेरे पास तो उस वक्त पैसे नही थे, बादशाह ने अपनी जेब से निकाल कर ५०० रपए , दिए फिर मन्नु वो पैसे लेकर अंदर गाया थोड़ी देर बाद आकर कुछ चिटियां और एक किताब बादशाह के हाथ मैं थामादि, और बोला यह लो , होगया फिर बादशाह मुझे बोला अब चल यहां से, फिर मै और बादशाह ,मेरे ऑटो रिक्शा मैं, बैठ कर आ रहे थे ,तभी रास्ते में एक फोटो स्टूडियो ,नजर आया, वहां रिक्शा रोकने को कहा मैने रिक्शा रोक दिया , तब बादशाह अंदर जाकर कुछ देर के बाद बाहर आया और किताब पर्चियां और फोटोस मुझे हाथ में थमा दिए,और कहा अब कुई चिंता मत करना , फिर कुछ आइडिया देखकर अपने काम पर निकाल पड़ा वो, वह बादशाह बादशाह ही था , जो उसका आइडिया कामयाब होगया, सही बालों तो, किस्मत वालों को ही ऐसा दोस्त मिलता है, और ऐसी डॉगी मिलती है, बस यह थी मेरी सच्ची डॉगी और इंसान की कहानी,इस कहानी से आप लोग क्या सीखे और क्या समझे मुझे कमेंट मैं जरूर बताना ,और मेरी कहानी को लाइक और शेर जरूर करना आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद,।

Z a KhanLast Seen: Mar 27, 2024 @ 8:09pm 20MarUTC

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